लोन ईएमआई न चुकाने पर न्यायालय का फरमान जारी हुआ

 Loan हमारे जीवन की सुख सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक है। Loan लेकर उसे चुकाना भी बहुत जरूरी है। अगर लोन नहीं भरते हैं तो हमे डिफॉल्टर की लिस्ट में शामिल किया जाता है। इसलिए इस से संबंधित एक मामला कोर्ट में पेश हुआ जिसमें न्यायालय ने ये ऑर्डर जारी किए है

अम्बेडकर नगर के रहने वाले राजेश ने वर्ष 2013 में महिंद्रा कार फाइनेंस पर खरीदी थी। इस कार के लिए उन्होंने 1 लाख का डाउनपेमेंट किया और बाकी लोन लिया था। इस लोन को चुकाने के लिए प्रत्येक माह  किस्त जमा करनी होती है। लेकिन करीबन 6  महीने तक कार की EMI जमा की गई उसके पश्चात कोई भी क़िस्त जमा नहीं की गई है। और लोन वालो ने वाहन को खींच लिया। 

कस्टमर को जब इस बात का पता चला तो वह केस दर्ज कराने के लिए कंज्यूमर कोर्ट चला गया। इस मामले में जब कार्यवाई की गई तो कंज्यूमर कोर्ट ने अपनी सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा करना एक अपराध की श्रेणी में आता है क्योंकि बिना किसी नोटिस के ग्राहक की गाड़ी को उठा दिया गया है। इसके लिए कोर्ट द्वारा फाइनेंसर पर 2 लाख 23 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया है। इसके साथ कोर्ट द्वारा बताया गया की फाइनेंसर द्वारा कस्टमर को क़िस्त जमा करने का अवसर सही से प्रदान नहीं किया गया।

कोर्ट का आदेश 

इसके बाद loan कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया है कि जिसने गाड़ी खरीदी वह एक डिफॉल्टर था, जिसने बयान में कहा है कि उसने 6 किस्तों को जमा कर लिया है। तथा फाइनेंसर द्वारा 7 माह के पश्चात ही गाड़ी पर कब्ज़ा किया गया। कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग द्वारा फाइनेंसर पर लगाए गए जुर्माने को अस्वीकृत कर दिया गया। लेकिन फाइनेंसर को 15000 रूपए का जुर्माना भरना होगा क्योंकि उसने ग्राहक को नोटिस नहीं दिया था।

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