राम मंदिर पर राजनीतिक सियासत क्यु चल रही है
राम मंदिर,
चीफ आर्किटेक्ट चन्द्रकांत सोमपुरा ने राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया है। राम मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया है कि 2500 सालों तक भूकंप के झटके भी राम मंदिर को न हिला सकें। एक इंटरव्यू के दौरान वास्तुकार चन्द्रकांत सोमपुरा ने बताया कि राम मंदिर नागर शैली का मंदिर है
क्या राम मंदिर का मुद्दा अब राजनीति का विषय बन गया है।
जहा सरकार इसे आस्था का केंद्र बना रही है वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक क्रेडिट बता रहा है। विपक्ष ने कहा है कि MP के चुनाव कुछ महीने बाद है इसलिए सरकार निर्माण पूर्ण होने से पहले ही प्राण प्रतिष्ठा करने जा रही हैं।
चार धाम के शंकराचार्य ने प्राण प्रतिष्ठा के समय को गलत ठहराया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज का वीडियो शेयर हो रहा है। इसमें कहा गया है कि चारों शंकराचार्य वहां पर नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग किसी राग या द्वेष के कारण नहीं जा रहे ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों का यह दायित्व है कि वे शास्त्रविधि का पालन करें और करवाएं। वहां पर शास्त्र विधि की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि सबसे पहली उपेक्षा यह है कि मंदिर अभी पूरा बना नहीं है और प्रतिष्ठा की जा रही है। कोई ऐसी परिस्थिति नहीं है कि अपने को अचानक कर देना पड़े। ये हमको कहना ही पड़ेगा पूछे जाने पर कि यह ठीक नहीं है।
राम मंदिर कितने रुपये में बनकर होगा तय्यार
आकड़ों की माने तो राम मंदिर पर अब तक 1100 करोड़ खर्च हो चुके हैं। और अभी 500 करोड़ और हो जाएगा खर्चा।
विपक्ष का कहना है कि इतने रुपये में कम से कम तीन यूनिवर्सिटी या फिर साधारण hospital बनाने मे कम से कम 2 करोड़ का खर्चा आएगा
पुरानी कहावतों में यह कहा गया है और संत रविदास ने कहा है कि
मन चंगा तो कठौती में गंगा'

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